बुधवार, 7 सितंबर 2011



साँसों का पिंजरा.......


साँसों का पिंजरा किसी दिन टूट जाएगा,


फिर मुसाफिर किसी राह में छूट जाएगा,


अभी साथ हैं तो याद कर लिया करो,


क्या पता कब ये मुक़द्दर हम से रूठ जाएगा............





मेरा ख्वाब..............




जाने कितने ही ख्वाब दफ़ना चुका हूं दिल मैं

अब तो लगता है जैसे खुद ही ब्रितान हूं मैं...!





यारों की महफ़िल..........



वो यारों की महफ़िलवो मुस्कराते पल,


दिल से जुड़ा है अपना बीता हुआ कल,


कभी ज़िंदगी गुज़रती थी हँसने हँसाने में,


आज वक़्त गुज़रता है काग़ज़ के टुकड़े कमाने में.....




खामोशी....




हर तर खामोशी का साया है,




जिदंगी में प्यार किसी ने पाया है




म यादों में झूमते हैं उसकी




जमाना हता है कि.....




देखो फ़िर पीकर या है.....


 रिश्तों का दर्द..........


रिश्ते बनाना तना आसान है  

जैसे मिट्टी र मिट्टी से मिट्टी लिखना..



और ...



निभाना उतना ही मुश्किल


जैसे पानी पर पानी से पानी लिखना.....





मेरी आदत......




एक आदत सी हो गई चोट खाने की,

भीगी हुई पलकों से मुस्कुराने की,

मेरे गम कोई नही समझ सका,

क्योंकि मेरी आदत थी गम में भी मुस्कुराने की.......


तनहाई........



तनहाई ना पाए कोई साथ के बाद,




जुदाई ना पाए कोई मुलाकात के बाद,



पड़े किसी को किसी की आदत इतनी,



की हर सांस भी आए उसकी याद के बाद........