बुधवार, 30 मई 2012


कहता है मेरा दिल..... 

वक्त भी चलते हुए घबरा रहा है आजकल,
कौन उसके पैर को फिसला रहा है आजकल?

रास्ते आसान है पर मंज़िलें मिलती नहीं,
हर कोई पत्थर से क्यों टकरा रहा है आजकल?

न्याय का दामन पकडकर चल रही है छुरियाँ,
सत्य अपने आपमें धुँधला रहा है आजकल?

पतझडों ने नींव रिश्तों की हिला दी इस तरह,
पेड़ खुद पत्तो से यूँ कतरा रहा है आजकल?

आप ने चेहरे की खुशबू को सलामत रखिए,
एक भँवरा आप पर मंडरा रहा है आजकल?

वक्त की नादानियत या बेकरारी प्यार की,
कौन ‘चातक’ मोम को पिघला रहा है आजकल?....

राजे उल्फत....


कुछ राज हैं जो हम उनको बता  नहीं पाते,
कुछ आंसू हैं जो हम उनको दिखा नहीं पाते,
एक हम बदनसीब हैं जो उनको याद तक नहीं!
और
एक वो खुशनसीब हैं जिन्हें हम भूला  नहीं पाते! 

वो.....!!

उसे बारिश पसंद है
.
मुझे बारिश में वो...!!!

उसे हँसना पसंद है..
मुझे हँसती हुई वो...!!!

उसे बोलना पसंद है...
मुझे बोलती हुई वो..!!

उसे सब कुछ पसंद है....
और मुझे बस वो.....!!  

सफरनामा.....

कितनी दूर निकल गया मैं रिश्ते निभाते निभाते
,
खुद को खो दिया मैने अपनों को पाते- पाते,
लोग कहते है कि दर्द है मेरे दिल में,
और मैं थक गया मुस्कराते-मुस्कराते.....!!

इंसानी फ़ितरत.....


जानता कोई कुछ भी नहीं...

लेकिन अपने को समझदार सभी समझते हैं!

सब खाली हाथ आए...सब खाली हाथ जाएँगे...
लेकिन मुट्ठी में दुनिया को क़ैद करने की चाह सभी में है!

इंसान, इंसान भी तो बन नहीं पाता....
लेकिन भगवान बनने की चाहत सभी में है!

वजूदे इंसा.....
                           
यह कफ़न.. यह क़ब्र.. यह
जनाज़ा रस्म--शरीयत हैं
मर तो इंसान तब ही
जाते हैं जब याद करने 
वाला कोई ना हो.....

उस्ताद ए इश्क़ सच कहा तूने

बहुत ही नालायक हूँ मैं
,

मुद्दत से एक शख्स को अपना

बनाना भी नहीं आया
..!